बजट 2025: सरकार शीर्ष 50 पर्यटन स्थलों का विकास करेगी
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को देश के शीर्ष 50 पर्यटन स्थलों को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए भारत के पर्यटन क्षेत्र को ऊपर उठाने की महत्वाकांक्षी योजनाओं की रूपरेखा तैयार की।
मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि केंद्र सरकार चुनौती मोड के जरिए राज्यों के साथ साझेदारी में देश में 50 पर्यटन स्थल विकसित करेगी। सीतारमण ने लोकसभा में केंद्रीय बजट 2025-26
पेश करते हुए घोषणा की कि प्रमुख बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए भूमि राज्यों को उपलब्ध करानी होगी। पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने होमस्टे को मुद्रा ऋण देने की योजना का भी खुलासा किया, जिससे यात्रा का अनुभव अधिक सुलभ हो सकेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। सीतारमण ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की विविध विरासत और सांस्कृतिक स्थल आर्थिक विकास की अपार संभावनाएं रखते
उन गंतव्यों के होटलों को इंफ्रास्ट्रक्चर एचएमएल (हार्मोनाइज्ड मास्टर लिस्ट) में शामिल किया जाएगा।
जुलाई के अंतरिम बजट में आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व के स्थानों पर अपना जोर जारी रखते हुए सरकार ने कहा कि भगवान बुद्ध के जीवन और समय से संबंधित स्थलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, क्षमता निर्माण और आसान वीजा मानदंडों के साथ-साथ निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी में भारत में चिकित्सा पर्यटन और उपचार को बढ़ावा दिया जाएगा।
वित्त मंत्री ने अपने केंद्रीय बजट 2025 के भाषण के दौरान यह भी घोषणा की कि 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई आयकर देय नहीं होगा, जिससे करदाताओं, विशेष रूप से मध्यम वर्ग को महत्वपूर्ण राहत मिलेगी।
वेतनभोगी करदाताओं के लिए यह सीमा 12.75 लाख रुपये होगी, जिसमें 75,000 रुपये की मानक कटौती शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि नई आयकर व्यवस्था सरल होगी, जिसमें मध्यम वर्ग को लाभ पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
लेकिन इसमें एक पेंच है: छूट तभी मिल सकती है जब कोई करदाता आयकर अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत राहत लेता है, जैसे कि धारा 80सीसीसी के तहत 1.5 लाख रुपये की छूट और होम लोन पर ब्याज चुकाने के लिए 1.5 लाख रुपये की छूट।
सीतारमण कहती हैं, "करदाताओं को स्लैब दर में कमी के कारण होने वाले लाभ के अलावा सामान्य आय (पूंजीगत लाभ जैसी विशेष दर आय को छोड़कर) के 12 लाख रुपये तक की कर छूट इस तरह से दी जा रही है कि उन्हें कोई कर नहीं देना है।"
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